पिवरिये रे मारग माथे (मारी मिमझर)

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यह बाड़मेर का वर्षा और कृषि गीत है। मरुभूमि में रिमझिम, लगातार बरसने वाली वर्षा को सबसे शुभ माना जाता है — इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और बाजरा, मूंग, ग्वार जैसी फसलें अच्छी होती हैं। इस गीत की हर पंक्ति में “मारी मिमझर” यानी रिमझिम वर्षा की टेक लौटती है। इसी रिमझिम में गीत एक-एक करके सब कुछ हरा होते दिखाता है — मायके के रास्ते की नीम, खेत, फसलें। साथ में लोकदेवता गोगाजी का स्मरण है और खेती में जुटा पूरा परिवार — हल चलाते पति और भाई, भोजन लेकर आती भाभी।

गीत

पिवरिये रे मारग माथे निंबड़ली लिलोणी रे मारी मिमझर
निंबड़ली लिलोणी रे मेरी मिमझर
निंबड़ली रे आडो में निंबड़ली रे पाड़ों में

ओठीड़ो थपाऊ रे मारी मिमझर
ओठीड़े रे आडो में ओठीड़े रे पाड़ों में

गोगाजी बेणाऊ रे मारी मिमझर
गोगाजी रे आडो में गोगाजी रे पाड़ों में
मेछड़ले झड़ मोन्डी रे मारी मिमझर

मारा सायब जी हळ हाके मारी मिमझर
मारा बीरोसा हळ हाके मारी मिमझर
बीरोसा रे आडो में बीरोसा रे पाड़ों में

भाभसड़ी भाते हाली मारी मिमझर
भाभसड़ी रे आडो में भाभसड़ी रे पाड़ों में

बाजरड़ी लीलोणी मारी मिमझर
बाजरड़ी हरियोणी मारी मिमझर
बाजरड़ी रे आडो में बाजरड़ी रे पाड़ों में

मूंगड़ला लीलोणा मारी मिमझर
मूंगड़ला रे आडो में मूंगड़ला रे पाड़ों में

ग्वारीड़ो लीलोणा मारी मिमझर

सरल अर्थ

रिमझिम वर्षा हो रही है। मायके जाने वाले रास्ते पर नीम हरी-भरी हो गई है — उसके इधर भी, उधर भी हरियाली फैल गई है।

रिमझिम में ऊँट को विश्राम कराया जा रहा है।

लोकदेवता गोगाजी का स्मरण किया जा रहा है — चारों ओर उनकी कृपा का मंगल वातावरण है। झाड़ियाँ और छोटे पौधे भी हरे हो गए हैं।

मेरे पति खेत में हल चला रहे हैं। मेरा भाई भी हल चला रहा है — उसके इधर भी, उधर भी खेती का काम चल रहा है।

भाभी हल चलाने वालों के लिए खेत में भोजन लेकर आ रही है।

बाजरा हरा-भरा होकर लहलहाने लगा है — बाजरे के इधर भी, उधर भी। मूंग हरी हो गई है — मूंग के इधर भी, उधर भी। और ग्वार की फसल भी रिमझिम वर्षा में हरी-भरी होकर लहलहा रही है।

यह गीत बाड़मेर में दर्ज किया गया। दस्तावेज़ीकरण और अनुवाद: टीना गौड़, अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय से इंटर्न।

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