अरे तुझ रे बिन ओ पंखी पंखरू रे तड़पे

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यह बाड़मेर का वर्षा-आमंत्रण गीत है। जब लंबे समय तक वर्षा नहीं होती, चारों ओर सूखा पड़ जाता है, तब गाँव की महिलाएँ इकट्ठी होकर यह गीत गाती हैं। मरुभूमि में जीवन पूरी तरह वर्षा पर टिका है — वर्षा न हो तो नाड़ी-नाले सूख जाते हैं, खेती रुक जाती है, पशुओं के लिए चारा-पानी नहीं बचता। इस गीत में वर्षा को घर आने का न्योता दिया गया है। हर अंतरे में बताया गया है कि उसके बिना किस-किस का जीवन ठहर जाता है — पक्षी से लेकर राजा तक, किसान से लेकर मायके जाने की राह देखती बेटी तक।

गीत
अरे तुझ रे बिन ओ पंखी पंखरू रे तड़पे पंखी पंखरू रे तड़पे रे
सूख रया वन सारा रे में हा झुड़ रे हा वन सारा रे घरैये पधारो रुत प्यारी
अरे तुझ रे बिन राणो रावण सूनो रे राणो रावण सूनो रे
भूपत भया भिखियारी रे में हा झुड़ रे हा वन सारा रे घरैये पधारो रुत प्यारी
अरे तुझ रे बिन नाड़ी नाळा नी चालें रै नाळा नी चालें रै
बिलखै भई मतवाली रै में हा झुड़ रे हा वन सारा रे घरैये पधारो रुत प्यारी
अरे तुझ रे बिन हळि हळियो नी हाके रे हळि हळियो नी हाके रे
बिलखै भई भतवारी रे में हा झुड़ रे हा वन सारा रे घरैये पधारो रुत प्यारी
अरे तुझ रे बिन गऊआ बछिया नी मेळे रे गऊआ बछिया नी मेळे रे
बिलखै भई डोझारी रे में हा झुड़ रे हा वन सारा रे घरैये पधारो रुत प्यारी
अरे तुझ रे बिन बंधु बेन नी तेड़े रे बंधु बेन नी तेड़े रे
बिलखै भई धियारी रे में हा झुड़ रे हा वन सारा रे घरैये पधारो रुत प्यारी
सूरदास के प्रभु तुम्हारे भजन में चरण कंबल बलिहारी रे
में हा झुड़ रे हा वन सारा रे घरैये पधारो रुत प्यारी

सरल अर्थ
हे वर्षा! तेरे बिना पक्षी तड़पते हैं और सारा वन सूख रहा है।
तेरे बिना राजा का वैभव भी सूना है — बड़े-बड़े राजा भिखारी जैसे हो जाते हैं।
तेरे बिना नाड़ी-नाले नहीं भरते, तो पानी भरने वाली पणिहारिन दुखी होती है।
तेरे बिना किसान हल नहीं चला पाता, तो खेत में उसका भोजन ले जाने वाली भतवारी दुखी होती है।
तेरे बिना गाय अपने बछड़े को दूध नहीं पिला पाती, तो उसकी देखभाल करने वाली दुखी होती है।
तेरे बिना भाई अपनी बहन को लेने नहीं जा पाता, तो बेटी अपने मायके नहीं आ पाती और वह भी दुखी रहती है।
अंत में सूरदास प्रभु के चरणों में सब कुछ अर्पित कर प्रार्थना करते हैं — हे प्यारी ऋतु, धीमी और लगातार बरसने वाली वर्षा बनकर हमारे घर पधारो।

यह गीत बाड़मेर में दर्ज किया गया। दस्तावेज़ीकरण और अनुवाद: टीना गौड़, अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय से इंटर्न।

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